NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) – संपूर्ण जानकारी
📊 NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) – संपूर्ण जानकारी
🔍 NPA क्या है? (परिभाषा)
NPA का पूरा नाम Non-Performing Asset है। सरल भाषा में, यह वह ऋण (लोन) है जो बैंक के लिए आय उत्पन्न करना बंद कर देता है ।
RBI के अनुसार, किसी ऋण को NPA तब घोषित किया जाता है जब:
| शर्त | समय सीमा |
|---|---|
| टर्म लोन का ब्याज या किस्त | 90 दिन से अधिक overdue |
| बिल्स पर्चेज एंड डिस्काउंटेड | 90 दिन से अधिक overdue |
| ओवरड्राफ्ट / कैश क्रेडिट | 90 दिनों तक "आउट ऑफ ऑर्डर" |
| कृषि ऋण (शॉर्ट ड्यूरेशन फसल) | 2 फसल मौसम overdue |
| कृषि ऋण (लॉन्ग ड्यूरेशन फसल) | 1 फसल मौसम overdue |
📂 एसेट के प्रकार (4 श्रेणियाँ)
RBI के अनुसार, बैंक के ऋणों को 4 श्रेणियों में बांटा गया है :
| प्रकार | परिभाषा | NPA? |
|---|---|---|
| 1. स्टैंडर्ड एसेट | नियमित भुगतान, कोई समस्या नहीं | ❌ नहीं |
| 2. सब-स्टैंडर्ड एसेट | 90 दिन से अधिक overdue लेकिन 12 माह से कम | ✅ हाँ |
| 3. डाउटफुल एसेट | सब-स्टैंडर्ड श्रेणी में 12 माह से अधिक समय बिता चुका | ✅ हाँ |
| 4. लॉस एसेट | जिस ऋण की वसूली असंभव हो; RBI ऑडिटर द्वारा पहचाना गया हो | ✅ हाँ |
प्रावधन (प्रोविजनिंग) दरें :
| एसेट प्रकार | प्रावधन दर |
|---|---|
| स्टैंडर्ड एसेट | 0.25% – 1.00% |
| सब-स्टैंडर्ड (सिक्योर्ड) | 15% |
| सब-स्टैंडर्ड (अनसिक्योर्ड) | 25% |
| डाउटफुल (1 वर्ष तक) | 25% (सिक्योर्ड), 100% (अनसिक्योर्ड) |
| डाउटफुल (1-3 वर्ष) | 40% |
| डाउटफुल (3 वर्ष से अधिक) | 100% |
| लॉस एसेट | 100% |
📈 NPA के प्रकार (बैंक के दृष्टिकोण से)
बैंक दो प्रकार के NPA देखते हैं:
| प्रकार | परिभाषा | फॉर्मूला |
|---|---|---|
| Gross NPA (सकल NPA) | बैंक के कुल ऋणों में से जो ऋण NPA हो गए हैं, उनका कुल मूल्य | (कुल NPA / कुल ऋण) × 100 |
| Net NPA (शुद्ध NPA) | Gross NPA में से प्रोविजनिंग घटाने के बाद बचा मूल्य | (Gross NPA – प्रोविजन) / (कुल ऋण – प्रोविजन) × 100 |
🏛️ NPA के कारण (Causes of NPA)
आंतरिक कारण (Internal – बोरोअर/बैंक से संबंधित) :
- धन का दुरुपयोग (Diversion of Funds) – लोन लेकर अलग काम में लगाना
- प्रोजेक्ट में देरी – समय पर पूरा न होना
- खराब क्रेडिट मॉनिटरिंग – बैंक की कमजोर निगरानी
- फ्रॉड और विलफुल डिफॉल्ट – जानबूझकर लोन न चुकाना
- मैनेजमेंट विवाद – कंपनी के अंदरूनी झगड़े
बाहरी कारण (External – बाजार/अर्थव्यवस्था से संबंधित) :
| कारण | प्रभाव |
|---|---|
| मंदी (Recession) | कंपनियों की कमाई घटी → लोन चुकाने में असमर्थ |
| ब्याज दरों में बढ़ोतरी | EMI बढ़ी → डिफॉल्ट बढ़े |
| सरकारी नीतियों में बदलाव | ड्यूटी, कर नियम बदलने से उद्योग प्रभावित |
| प्राकृतिक आपदा | कृषि ऋण प्रभावित |
⚖️ NPA रिकवरी के कानूनी उपाय (Legal Remedies)
भारत में NPA वसूली के लिए 4 मुख्य कानूनी रास्ते हैं :
| कानून | वर्ष | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|---|
| SARFAESI Act | 2002 | बिना कोर्ट गए सिक्योर्ड एसेट को जब्त और नीलाम करने का अधिकार |
| DRT (Debt Recovery Tribunal) | 1993 | ₹20 लाख से अधिक के ऋण के लिए विशेष अदालतें |
| IBC (Insolvency & Bankruptcy Code) | 2016 | टाइम-बाउंड (330 दिन) कॉरपोरेट रिजॉल्यूशन प्रक्रिया |
| Lok Adalat | — | छोटे ऋणों (₹20 लाख तक) के लिए समझौता मार्ग |
· 90 दिन के NPA होने पर बैंक डिफॉल्टर को 60 दिन का नोटिस देता है
· नोटिस का जवाब न देने पर बैंक बिना कोर्ट गए प्रॉपर्टी जब्त और नीलाम कर सकता है
· सीमा: केवल सिक्योर्ड लोन पर लागू; एग्रीकल्चर लोन पर लागू नहीं
· 330 दिन में केस खत्म करने की समयसीमा
· क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) निर्णय लेती है
· रिकवरी रेट: 32.8% (DRT/SARFAESI से बेहतर)
· उदाहरण: एस्सार स्टील, भूषण स्टील जैसे बड़े केस सफलतापूर्वक रिजॉल्व हुए
तुलना (रिकवरी रेट) :
| उपाय | रिकवरी दर (%) |
|---|---|
| Lok Adalat | ~10% |
| DRT | ~15-20% |
| SARFAESI | ~20-25% |
| IBC | ~32.8% |
🏦 ARC (एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी) – NPA का बाजार
ARC (Asset Reconstruction Company) वह संस्था है जो बैंकों से डिस्काउंट पर NPA खरीदती है और फिर उसकी वसूली करती है।
कैसे काम करता है?
- बैंक NPA को ARC को बेचता है (30-50% डिस्काउंट पर)
- ARC उस NPA को रिजॉल्व करने की कोशिश करता है
- ARC को जो भी रिकवरी मिलती है, वह लाभ कमाता है
2025 के आंकड़े :
- प्राइवेट बैंक ने अपने पिछले साल के GNPA का 35.9% ARC को बेचा
- पब्लिक सेक्टर बैंक ने केवल 2.6-3% ARC को बेचा
- विदेशी बैंक ने 55.5% ARC को बेचा
PSU बैंक SARFAESI/DRT/IBC को तरजीह देते हैं, जबकि प्राइवेट और विदेशी बैंक ARC को जल्दी बेचना पसंद करते हैं।
📊 वर्तमान स्थिति (2025 के आंकड़े)
सितंबर 2025 तक सिस्टम-वाइड GNPA रेशियो: 2.1% (बहु-दशकीय निचले स्तर)
बैंक-वार GNPA रेशियो (मार्च 2025) :
| बैंक प्रकार | GNPA रेशियो (मार्च 2025) | GNPA राशि (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| पब्लिक सेक्टर बैंक (PSB) | 2.58% | 2,83,650 |
| प्राइवेट सेक्टर बैंक (PVB) | 1.75% | 1,32,646 |
| स्मॉल फाइनेंस बैंक (SFB) | 3.6% | ~10,000 (अनुमानित) |
सेक्टर-वार NPA (PSBs & PVBs, मार्च 2025) :
| सेक्टर | PSB NPA (₹ करोड़) | PVB NPA (₹ करोड़) |
|---|---|---|
| एग्रीकल्चर | 1,09,193 | 31,483 |
| इंडस्ट्री (MSME सहित) | 65,365 | 25,669 |
| सर्विसेज (MSME सहित) | 67,997 | 53,393 |
| रिटेल लोन | 41,095 | 22,101 |
NPA में गिरावट का मुख्य कारण: रिकवरी और अपग्रेडेशन (GNPA कमी का 42.8%) + बड़े लिखत।
📜 2025 के नए नियम (RBI की नई दिशा-निर्देश)
RBI ने 28 नवंबर 2025 को नए IRACP (Income Recognition, Asset Classification & Provisioning) दिशा-निर्देश जारी किए :
- डे-एंड प्रोसेस – NPA क्लासिफिकेशन अब दिन के अंत में किया जाएगा
- SMA (Special Mention Account) की परिभाषा स्पष्ट की गई
- सिस्टम-बेस्ड एसेट क्लासिफिकेशन – ₹2000 करोड़ से अधिक एसेट वाले बैंकों के लिए अनिवार्य
- ECL (Expected Credit Loss) फ्रेमवर्क – 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा
📝 एक नज़र में महत्वपूर्ण बातें
| विषय | एक लाइन में जानकारी |
|---|---|
| NPA का फुल फॉर्म | Non-Performing Asset |
| NPA कब घोषित होता है? | 90 दिन से अधिक overdue |
| एसेट के 4 प्रकार | स्टैंडर्ड → सब-स्टैंडर्ड → डाउटफुल → लॉस |
| सबसे अधिक रिकवरी वाला कानून | IBC (32.8%) |
| बिना कोर्ट गए रिकवरी का कानून | SARFAESI Act, 2002 |
| वर्तमान GNPA रेशियो (सितंबर 2025) | 2.1% (बहु-दशकीय निचला स्तर) |
| NPA कमी के कारण (2025) | 42.8% रिकवरी + अपग्रेडेशन से |
| सबसे अच्छा बैंक ग्रुप | फॉरेन बैंक (GNPA <1%) |
| सबसे ज्यादा NPA वाला सेक्टर | सर्विसेज (₹1.21 लाख करोड़) |
🧠 ट्रिक (परीक्षा के लिए याद करें)
SARFAESI बिना कोर्ट, IBC बनाए सबसे शॉर्ट।
2.1% पर NPA आया, PSB का घाटा भगाया।
फॉरेन बैंक का GNPA 1% से कम, सबसे साफ उनका हर एक दम। 😊"
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