12 भारत में BASEL मानदंड

भारत में BASEL मानदंड: वर्तमान स्थिति और भविष्य | UGC NET तथ्य

🏦 भारत में BASEL मानदंड अद्यतन 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा कार्यान्वित वैश्विक बैंकिंग नियम
📅 जून 2026 तक वर्तमान स्थिति ➜ BASEL III पूर्णतः सक्रिय
📌 वर्तमान स्थिति | BASEL III (पूर्णतः प्रभावी)
✅ लागू मानदंड BASEL III (चरणबद्ध कार्यान्वयन पूर्ण)
⏳ प्रारंभ 2013 से चरणबद्ध, 2019 में पूर्णतः लागू
🆕 नवीनतम नियम RBI ने LCR (Liquidity Coverage Ratio) अंतिम दिशानिर्देश जारी किये — 1 अप्रैल 2026 से पूर्ण प्रभावी
🏛️ नियामक निकाय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
RBI की मुहर: BASEL III के तहत सभी अनुपात (CAR, CCB, LCR) अब पूर्ण रूप से सक्रिय हैं। बैंकों को 30 दिनों की नकदी (LCR) रखना अनिवार्य हो गया है।
⚖️ BASEL III के प्रमुख नियम (RBI द्वारा)
CET1 (कोर इक्विटी)न्यूनतम 5.5% (इक्विटी + आरक्षित निधि)
Tier 1 पूंजीन्यूनतम 7% (CET1 + AT1)
कुल पूंजी पर्याप्तता (CAR)न्यूनतम 9% (RBI मानक, BASEL से अधिक कड़ा)
पूंजी संरक्षण बफर (CCB)2.5% अतिरिक्त — 2019 से लागू
प्रति-चक्रीय बफर (CCyB)0–2.5% (RBI द्वारा अधिसूचित)
LCR (तरलता कवरेज अनुपात)1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य — बैंकों के पास 30 दिन की नकदी पर्याप्तता
📢 नोट: भारत में BASEL III का कार्यान्वयन RBI द्वारा अधिक रूढ़िवादी रखा गया है, CAR 9% (जबकि BASEL III में 8%)।
⏳ BASEL IV (अंतिम सुधार / Basel III: Finalising post-crisis reforms) 1 अप्रैल 2027 से प्रस्तावित

जानकारी: BASEL IV कोई नया संस्करण नहीं, बल्कि BASEL III में टेक्निकल सुधार। जिसे "Basel 3.5" या "अंतिम सुधार" कहा जाता है। RBI ने 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

मानदंड (प्रस्तावित)सरल भाषा में व्याख्या
📊 आउटपुट फ्लोर (Output Floor) बैंकों की आंतरिक जोखिम गणना 72.5% से कम नहीं हो सकती। इससे बैंक कृत्रिम रूप से कम जोखिम नहीं दिखा सकते।
📉 क्रेडिट रिस्क – स्टैंडर्डाइज्ड अप्रोच (ECL फ्रेमवर्क) RBI ने ECL (Expected Credit Loss) ढाँचा अप्रैल 2027 से लागू करने का निर्णय लिया। लोन देने से पहले ही संभावित डूबत ऋण का अनुमान लगाकर प्रावधान अनिवार्य होगा।
⚙️ ऑपरेशनल रिस्क का नया फॉर्मूला पुराने जटिल मॉडल को हटाकर सरल, मानकीकृत मापदंड (SMA) लागू किया जाएगा।
💱 FOREX (विदेशी मुद्रा) जोखिम ढाँचा RBI ने BASEL अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप FOREX जोखिम ढाँचे को कड़ा करने का प्रस्ताव रखा है।
📢 डिस्क्लोजर मानदंड (पूंजी पर्याप्तता प्रकटीकरण) सभी बैंकों (सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध) के लिए पूंजी पर्याप्तता प्रकटीकरण मानदंडों को एक समान किया जाएगा — अधिक पारदर्शिता।
🕒 संक्रमण अवधि: RBI ने बैंकों को BASEL IV मानकों के लिए तैयार रहने को कहा है। आउटपुट फ्लोर और ECL मॉडल भारतीय बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत बनाएंगे।
💧
LCR (Liquidity Coverage Ratio) – 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य रूप से लागू
RBI के अनुसार सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को अब 30 दिनों के तनाव परिदृश्य के लिए पर्याप्त उच्च-गुणवत्ता तरल संपत्ति (HQLA) रखनी होगी। यह BASEL III का अंतिम स्तंभ है जो इस वर्ष पूर्ण हुआ।
🎯 UGC NET परीक्षा ट्रिक (याद रखने का आसान तरीका):
"अभी BASEL III चल रहा है भारत में, 1 अप्रैल 2027 से BASEL IV होगा लागू, यही है BASEL का पूरा ज्ञान 😊"
📖 BASEL IV = मौजूदा BASEL III का अंतिम शोधन (72.5% आउटपुट फ्लोर, ECL मॉडल, ऑपरेशनल रिस्क सरल)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बेसल (BASEL) – अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नियमों की पूरी गाइड

13 वित्त आयोग (Finance Commission) – संपूर्ण जानकारी

SDR